सीताफल और मुनगा ने राजकुमार और रामकृष्ण को बनाया प्रगतिशील किसान

Posted on 14 Jun, 2018 4:27 pm

 

प्रदेश में क्षेत्रवार जलवायु के अनुसार कृषि की आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए उद्यानिकी फसल लेने से किसानों की आय में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी हुई है।नीमच जिले के जावद विकासखण्ड के किसान राजकुमार बोहरा के मन में कृषि आय को बढ़ाने की ललक थी। उन्होंने इस संबंध में उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें संतरा, अनार और अमरूद के स्थान पर सीताफल की खेती करने की सलाह दी।

राजकुमार ने 0.5 हेक्टेयर में 10 गुणा 12 मीटर की दूरी पर सीताफल के पौधे लगाये। उन्हें 4-5 वर्ष बाद प्रति पौधा 20 किलो सीताफल प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे 50 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा। इससे उन्हें 2.50 लाख रुपये की आमदनी हुई। लागत का 50 हजार रुपये काटकर उन्हें 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ।

किसान राजकुमार ने सीताफल की खेती के अच्छे रिजल्ट देखकर अपनी 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि में भी सीताफल के पौधे लगाने का निर्णय लिया। इसके बाद तो उनकी शुद्ध आय में लगातार वृद्धि होती गई। राजकुमार बोहरा अब अपने क्षेत्र के किसानों को उद्यानिकी फसल लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

सिवनी मालवा के ग्राम निरकी के किसान रामकृष्ण रघुवंशी ने परम्परागत खेती से सीमित आमदनी की समस्या के बारे में किसान कल्याण विभाग के आत्मा परियोजना के अधिकारी एमएल दिलवारिया से चर्चा की, तो उन्हें मुनगे के पेड़ लगाकर मुनाफा कमाने का नुस्खा मिला। रामकृष्ण ने अपने खेत के 5 एकड़ में 3200 मुनगे के पेड़ लगाये। उनके इस फैसले का आस-पास के किसानों ने मजाक भी उड़ाया। रामकृष्ण ने अपने निर्णय पर अड़िग रहते हुए पेड़ो की देखभाल की। उन्हें अब मुनगे के एक पेड़ से 55 से 60 किलो और कभी-कभी 90 किलो तक मुनगा प्राप्त हो जाता है। आज उनके खेत में पैदा होने वाला मुनगा भोपाल और मुम्बई की कृषि मंडियों में पहुँच रहा है। उन्होंने मुनगे के उत्पादन से अपनी कृषि आय दस गुना तक बढ़ा ली है।

किसान रामकृष्ण ने अपने खेत में अंतरवर्तीय फसल लेना भी शुरू कर दिया है। मुनगे के पेड़ के आस-पास खाली जगह पर गेंदा फूल, तरबूज पिपरमेंट, टमाटर, पुदीनहरा के बीज भी लगाये। इससे उन्हें दो गुना मुनाफा हो रहा है। रामकृष्ण के खेत में ड्रिप एरीगेशन की सुविधा है। अब उन्होंने एक एकड़ कृषि भूमि पर जैविक खेती करना भी शुरू कर दिया है।

सक्सेस स्टोरी (नीमच, सिवनी मालवा)

साभार – जनसम्पर्क विभाग मध्यप्रदेश